अध्याय 12, श्लोक 9
अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवतीवाक्य (फलश्रुति)बलिप्रदाने पूजायामग्निकार्ये महोत्सवे । सर्वं ममैतन्माहात्म्यम् उच्चार्यं श्राव्यमेव च ॥
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लिप्यंतरण
balipradāne pūjāyāmagnikārye mahotsave sarvaṃ mamaitanmāhātmyam uccāryaṃ śrāvyameva ca
अर्थ
बलि अर्पण में, पूजा में, अग्निकार्य में और महोत्सव में — मेरा यह सम्पूर्ण माहात्म्य उच्चारण करने और सुनने योग्य है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 12.9 का अर्थ क्या है?▼
बलि अर्पण में, पूजा में, अग्निकार्य में और महोत्सव में — मेरा यह सम्पूर्ण माहात्म्य उच्चारण करने और सुनने योग्य है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 9वाँ श्लोक है।