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दुर्गा सप्तशती 12.7

अध्याय 12, श्लोक 7

अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti)भगवतीवाक्य (फलश्रुति)

उपसर्गानशेषांस्तु महामारीसमुद्भवान् तथा त्रिविधमुत्पातं माहात्म्यं शमयेन्मम

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लिप्यंतरण

upasargānaśeṣāṃstu mahāmārīsamudbhavān tathā trividhamutpātaṃ māhātmyaṃ śamayenmama

अर्थ

मेरा यह माहात्म्य महामारी से उत्पन्न समस्त उपसर्गों, तथा तीन प्रकार के उत्पातों को शान्त कर दे।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 12.7 का अर्थ क्या है?
मेरा यह माहात्म्य महामारी से उत्पन्न समस्त उपसर्गों, तथा तीन प्रकार के उत्पातों को शान्त कर दे।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 7वाँ श्लोक है।