अध्याय 12, श्लोक 6
अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवतीवाक्य (फलश्रुति)तस्मान्ममैतन्माहात्म्यं पठितव्यं समाहितैः । श्रोतव्यं च सदा भक्त्या परं स्वस्त्ययनं महत् ॥
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लिप्यंतरण
tasmānmamaitanmāhātmyaṃ paṭhitavyaṃ samāhitaiḥ śrotavyaṃ ca sadā bhaktyā paraṃ svastyayanaṃ mahat
अर्थ
इसलिए मेरा यह माहात्म्य एकाग्रचित्त होकर पढ़ना चाहिए और सदा भक्ति से सुनना चाहिए; यह परम और महान् कल्याणकारी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 12.6 का अर्थ क्या है?▼
इसलिए मेरा यह माहात्म्य एकाग्रचित्त होकर पढ़ना चाहिए और सदा भक्ति से सुनना चाहिए; यह परम और महान् कल्याणकारी है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 6वाँ श्लोक है।