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दुर्गा सप्तशती 12.5

अध्याय 12, श्लोक 5

अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti)भगवतीवाक्य (फलश्रुति)

शत्रुभ्यो भयं तस्य दस्युतो वा राजतः शस्त्रानलतोयौघात्कदाचित् सम्भविष्यति

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लिप्यंतरण

śatrubhyo na bhayaṃ tasya dasyuto vā na rājataḥ na śastrānalatoyaughātkadācit sambhaviṣyati

अर्थ

उसे शत्रुओं से भय न होगा, न चोरों से, न राजा से; शस्त्र, अग्नि और जल-प्रवाह से भी कभी (हानि) न होगी।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 12.5 का अर्थ क्या है?
उसे शत्रुओं से भय न होगा, न चोरों से, न राजा से; शस्त्र, अग्नि और जल-प्रवाह से भी कभी (हानि) न होगी।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 5वाँ श्लोक है।