अध्याय 12, श्लोक 4
अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवतीवाक्य (फलश्रुति)न तेषां दुष्कृतं किञ्चिद्दुष्कृतोत्था न चापदः । भविष्यति न दारिद्र्यं न चैवेष्टवियोजनम् ॥
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लिप्यंतरण
na teṣāṃ duṣkṛtaṃ kiñcidduṣkṛtotthā na cāpadaḥ bhaviṣyati na dāridryaṃ na caiveṣṭaviyojanam
अर्थ
उन्हें न कोई दुष्कर्म होगा, न दुष्कर्मों से उत्पन्न विपत्तियाँ; न दरिद्रता, और न ही प्रियजनों का वियोग।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 12.4 का अर्थ क्या है?▼
उन्हें न कोई दुष्कर्म होगा, न दुष्कर्मों से उत्पन्न विपत्तियाँ; न दरिद्रता, और न ही प्रियजनों का वियोग।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 4वाँ श्लोक है।