अध्याय 12, श्लोक 3
अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवतीवाक्य (फलश्रुति)अष्टम्यां च चतुर्दश्यां नवम्यां चैकचेतसः । श्रोष्यन्ति चैव ये भक्त्या मम माहात्म्यमुत्तमम् ॥
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लिप्यंतरण
aṣṭamyāṃ ca caturdaśyāṃ navamyāṃ caikacetasaḥ śroṣyanti caiva ye bhaktyā mama māhātmyamuttamam
अर्थ
और जो अष्टमी, चतुर्दशी तथा नवमी को एकचित्त होकर भक्तिपूर्वक मेरे इस उत्तम माहात्म्य को सुनेंगे —
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 12.3 का अर्थ क्या है?▼
और जो अष्टमी, चतुर्दशी तथा नवमी को एकचित्त होकर भक्तिपूर्वक मेरे इस उत्तम माहात्म्य को सुनेंगे —
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 3वाँ श्लोक है।