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दुर्गा सप्तशती 12.2

अध्याय 12, श्लोक 2

अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti)भगवतीवाक्य (फलश्रुति)

मधुकैटभनाशं महिषासुरघातनम् कीर्तयिष्यन्ति ये तद्वद्वधं शुम्भनिशुम्भयोः

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लिप्यंतरण

madhukaiṭabhanāśaṃ ca mahiṣāsuraghātanam kīrtayiṣyanti ye tadvadvadhaṃ śumbhaniśumbhayoḥ

अर्थ

और जो मधु-कैटभ के नाश, महिषासुर के वध, तथा वैसे ही शुम्भ-निशुम्भ के वध का कीर्तन करेंगे,

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 12.2 का अर्थ क्या है?
और जो मधु-कैटभ के नाश, महिषासुर के वध, तथा वैसे ही शुम्भ-निशुम्भ के वध का कीर्तन करेंगे,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 2वाँ श्लोक है।