अध्याय 12, श्लोक 1
अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवतीवाक्य (फलश्रुति)ॐ देव्युवाच एभिः स्तवैश्च मां नित्यं स्तोष्यते यः समाहितः । तस्याहं सकलां बाधां शमयिष्याम्यसंशयम् ॥
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लिप्यंतरण
oṃ devyuvāca ebhiḥ stavaiśca māṃ nityaṃ stoṣyate yaḥ samāhitaḥ tasyāhaṃ sakalāṃ bādhāṃ śamayiṣyāmyasaṃśayam
अर्थ
(ॐ। देवी बोलीं —) 'जो एकाग्रचित्त होकर इन स्तुतियों से सदा मेरी स्तुति करेगा, उसकी समस्त बाधा मैं निःसंदेह शान्त कर दूँगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 12.1 का अर्थ क्या है?▼
(ॐ। देवी बोलीं —) 'जो एकाग्रचित्त होकर इन स्तुतियों से सदा मेरी स्तुति करेगा, उसकी समस्त बाधा मैं निःसंदेह शान्त कर दूँगी।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 1वाँ श्लोक है।