अध्याय 11, श्लोक 51
अध्याय 11: Nārāyaṇī Stuti — नारायणीस्तुतितदा तदावतीर्याहं करिष्याम्यरिसङ्क्षयम् ॥
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लिप्यंतरण
tadā tadāvatīryāhaṃ kariṣyāmyarisaṅkṣayam
अर्थ
तब-तब मैं अवतीर्ण होकर शत्रुओं का संहार करूँगी।'
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 11.51 का अर्थ क्या है?▼
तब-तब मैं अवतीर्ण होकर शत्रुओं का संहार करूँगी।'
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 51वाँ श्लोक है।