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दुर्गा सप्तशती 11.50

अध्याय 11, श्लोक 50

अध्याय 11: Nārāyaṇī Stutiनारायणीस्तुति

भ्रामरीति मां लोकास्तदा स्तोष्यन्ति सर्वतः इत्थं यदा यदा बाधा दानवोत्था भविष्यति

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लिप्यंतरण

bhrāmarīti ca māṃ lokāstadā stoṣyanti sarvataḥ itthaṃ yadā yadā bādhā dānavotthā bhaviṣyati

अर्थ

और तब लोग सर्वत्र मुझे 'भ्रामरी' कहकर स्तुति करेंगे। इस प्रकार जब-जब दानवों से उत्पन्न विपत्ति होगी,

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 11.50 का अर्थ क्या है?
और तब लोग सर्वत्र मुझे 'भ्रामरी' कहकर स्तुति करेंगे। इस प्रकार जब-जब दानवों से उत्पन्न विपत्ति होगी,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 11 (Nārāyaṇī Stuti — नारायणी स्तुति) का 50वाँ श्लोक है।