अध्याय 12, श्लोक 35
अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवतीवाक्य (फलश्रुति)तयैतन्मोह्यते विश्वं सैव विश्वं प्रसूयते । सा याचिता च विज्ञानं तुष्टा ऋद्धिं प्रयच्छति ॥
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लिप्यंतरण
tayaitanmohyate viśvaṃ saiva viśvaṃ prasūyate sā yācitā ca vijñānaṃ tuṣṭā ṛddhiṃ prayacchati
अर्थ
उन्हीं से यह विश्व मोहित होता है; वही विश्व को प्रकट करती हैं। प्रार्थना करने पर वे विज्ञान देती हैं, और प्रसन्न होने पर समृद्धि प्रदान करती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 12.35 का अर्थ क्या है?▼
उन्हीं से यह विश्व मोहित होता है; वही विश्व को प्रकट करती हैं। प्रार्थना करने पर वे विज्ञान देती हैं, और प्रसन्न होने पर समृद्धि प्रदान करती हैं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 35वाँ श्लोक है।