Mantra.Tips
दुर्गा सप्तशती 12.34

अध्याय 12, श्लोक 34

अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti)भगवतीवाक्य (फलश्रुति)

एवं भगवती देवी सा नित्यापि पुनः पुनः सम्भूय कुरुते भूप जगतः परिपालनम्

🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ

लिप्यंतरण

evaṃ bhagavatī devī sā nityāpi punaḥ punaḥ sambhūya kurute bhūpa jagataḥ paripālanam

अर्थ

इस प्रकार वह भगवती देवी नित्या होने पर भी बार-बार प्रकट होकर जगत् का पालन करती हैं, हे राजन्।

इस श्लोक को साझा करें
Share:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 12.34 का अर्थ क्या है?
इस प्रकार वह भगवती देवी नित्या होने पर भी बार-बार प्रकट होकर जगत् का पालन करती हैं, हे राजन्।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 34वाँ श्लोक है।