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दुर्गा सप्तशती 12.33

अध्याय 12, श्लोक 33

अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti)भगवतीवाक्य (फलश्रुति)

जगद्विध्वंसके तस्मिन् महोग्रेऽतुलविक्रमे निशुम्भे महावीर्ये शेषाः पातालमाययुः

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लिप्यंतरण

jagadvidhvaṃsake tasmin mahogre'tulavikrame niśumbhe ca mahāvīrye śeṣāḥ pātālamāyayuḥ

अर्थ

तथा जगत् का विध्वंस करने वाले, अतुलनीय पराक्रमी, महावीर्य निशुम्भ के (मारे जाने पर) — शेष दैत्य पाताल चले गए।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 12.33 का अर्थ क्या है?
तथा जगत् का विध्वंस करने वाले, अतुलनीय पराक्रमी, महावीर्य निशुम्भ के (मारे जाने पर) — शेष दैत्य पाताल चले गए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 33वाँ श्लोक है।