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दुर्गा सप्तशती 12.27

अध्याय 12, श्लोक 27

अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti)भगवतीवाक्य (फलश्रुति)

पतत्सु चापि शस्त्रेषु सङ्ग्रामे भृशदारुणे सर्वाबाधासु घोरासु वेदनाभ्यर्दितोऽपि वा

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लिप्यंतरण

patatsu cāpi śastreṣu saṅgrāme bhṛśadāruṇe sarvābādhāsu ghorāsu vedanābhyardito'pi vā

अर्थ

अथवा अत्यन्त भयंकर संग्राम में गिरते हुए शस्त्रों के बीच, या समस्त घोर बाधाओं में, या वेदना से पीड़ित —

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 12.27 का अर्थ क्या है?
अथवा अत्यन्त भयंकर संग्राम में गिरते हुए शस्त्रों के बीच, या समस्त घोर बाधाओं में, या वेदना से पीड़ित —
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 27वाँ श्लोक है।