अध्याय 12, श्लोक 28
अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवतीवाक्य (फलश्रुति)स्मरन् ममैतच्चरितं नरो मुच्येत सङ्कटात् । मम प्रभावात्सिंहाद्या दस्यवो वैरिणस्तथा ॥
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लिप्यंतरण
smaran mamaitaccaritaṃ naro mucyeta saṅkaṭāt mama prabhāvātsiṃhādyā dasyavo vairiṇastathā
अर्थ
जो मनुष्य मेरे इस चरित्र का स्मरण करता है, वह संकट से मुक्त हो जाता है। मेरे प्रभाव से सिंह आदि, डाकू और शत्रु भी,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 12.28 का अर्थ क्या है?▼
जो मनुष्य मेरे इस चरित्र का स्मरण करता है, वह संकट से मुक्त हो जाता है। मेरे प्रभाव से सिंह आदि, डाकू और शत्रु भी,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 28वाँ श्लोक है।