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दुर्गा सप्तशती 12.26

अध्याय 12, श्लोक 26

अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti)भगवतीवाक्य (फलश्रुति)

राज्ञा क्रुद्धेन चाज्ञप्तो वध्यो बन्धगतोऽपि वा आघूर्णितो वा वातेन स्थितः पोते महार्णवे

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लिप्यंतरण

rājñā kruddhena cājñapto vadhyo bandhagato'pi vā āghūrṇito vā vātena sthitaḥ pote mahārṇave

अर्थ

अथवा क्रुद्ध राजा की आज्ञा से वध के योग्य या बन्धन में पड़ा हुआ, या महासागर में नाव पर वायु से झकझोरा हुआ,

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 12.26 का अर्थ क्या है?
अथवा क्रुद्ध राजा की आज्ञा से वध के योग्य या बन्धन में पड़ा हुआ, या महासागर में नाव पर वायु से झकझोरा हुआ,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 26वाँ श्लोक है।