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दुर्गा सप्तशती 12.20

अध्याय 12, श्लोक 20

अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti)भगवतीवाक्य (फलश्रुति)

विप्राणां भोजनैर्होमैः प्रोक्षणीयैरहर्निशम् अन्यैश्च विविधैर्भोगैः प्रदानैर्वत्सरेण या

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लिप्यंतरण

viprāṇāṃ bhojanairhomaiḥ prokṣaṇīyairaharniśam anyaiśca vividhairbhogaiḥ pradānairvatsareṇa yā

अर्थ

ब्राह्मणों के भोजन, होम और प्रोक्षण-कर्मों से, दिन-रात, और अन्य अनेक भोग व दानों से, वर्ष भर में —

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 12.20 का अर्थ क्या है?
ब्राह्मणों के भोजन, होम और प्रोक्षण-कर्मों से, दिन-रात, और अन्य अनेक भोग व दानों से, वर्ष भर में —
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 20वाँ श्लोक है।