अध्याय 12, श्लोक 19
अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवतीवाक्य (फलश्रुति)सर्वं ममैतन्माहात्म्यं मम सन्निधिकारकम् । पशुपुष्पार्घ्यधूपैश्च गन्धदीपैस्तथोत्तमैः ॥
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लिप्यंतरण
sarvaṃ mamaitanmāhātmyaṃ mama sannidhikārakam paśupuṣpārghyadhūpaiśca gandhadīpaistathottamaiḥ
अर्थ
यह सम्पूर्ण माहात्म्य मेरी सन्निधि कराने वाला है। और पशु, पुष्प, अर्घ्य, धूप, तथा उत्तम गन्ध और दीपों से,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 12.19 का अर्थ क्या है?▼
यह सम्पूर्ण माहात्म्य मेरी सन्निधि कराने वाला है। और पशु, पुष्प, अर्घ्य, धूप, तथा उत्तम गन्ध और दीपों से,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 19वाँ श्लोक है।