अध्याय 12, श्लोक 18
अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवतीवाक्य (फलश्रुति)दुर्वृत्तानामशेषाणां बलहानिकरं परम् । रक्षोभूतपिशाचानां पठनादेव नाशनम् ॥
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लिप्यंतरण
durvṛttānāmaśeṣāṇāṃ balahānikaraṃ param rakṣobhūtapiśācānāṃ paṭhanādeva nāśanam
अर्थ
यह समस्त दुराचारियों के बल को घटाने वाला परम (साधन) है; इसके पाठ मात्र से राक्षसों, भूतों और पिशाचों का नाश हो जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 12.18 का अर्थ क्या है?▼
यह समस्त दुराचारियों के बल को घटाने वाला परम (साधन) है; इसके पाठ मात्र से राक्षसों, भूतों और पिशाचों का नाश हो जाता है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 18वाँ श्लोक है।