अध्याय 12, श्लोक 17
अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवतीवाक्य (फलश्रुति)बालग्रहाभिभूतानां बालानां शान्तिकारकम् । सङ्घातभेदे च नृणां मैत्रीकरणमुत्तमम् ॥
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लिप्यंतरण
bālagrahābhibhūtānāṃ bālānāṃ śāntikārakam saṅghātabhede ca nṛṇāṃ maitrīkaraṇamuttamam
अर्थ
यह बालग्रहों से पीड़ित बच्चों को शान्ति देने वाला है; और मनुष्यों में फूट पड़ने पर मैत्री कराने का उत्तम साधन है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 12.17 का अर्थ क्या है?▼
यह बालग्रहों से पीड़ित बच्चों को शान्ति देने वाला है; और मनुष्यों में फूट पड़ने पर मैत्री कराने का उत्तम साधन है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 17वाँ श्लोक है।