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दुर्गा सप्तशती 12.16

अध्याय 12, श्लोक 16

अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti)भगवतीवाक्य (फलश्रुति)

उपसर्गाः शमं यान्ति ग्रहपीडाश्च दारुणाः दुःस्वप्नं नृभिर्दृष्टं सुस्वप्नमुपजायते

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लिप्यंतरण

upasargāḥ śamaṃ yānti grahapīḍāśca dāruṇāḥ duḥsvapnaṃ ca nṛbhirdṛṣṭaṃ susvapnamupajāyate

अर्थ

उपसर्ग शान्त हो जाते हैं, और दारुण ग्रह-पीड़ाएँ भी; और मनुष्यों द्वारा देखा गया दुःस्वप्न सुस्वप्न में बदल जाता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 12.16 का अर्थ क्या है?
उपसर्ग शान्त हो जाते हैं, और दारुण ग्रह-पीड़ाएँ भी; और मनुष्यों द्वारा देखा गया दुःस्वप्न सुस्वप्न में बदल जाता है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 16वाँ श्लोक है।