अध्याय 12, श्लोक 16
अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवतीवाक्य (फलश्रुति)उपसर्गाः शमं यान्ति ग्रहपीडाश्च दारुणाः । दुःस्वप्नं च नृभिर्दृष्टं सुस्वप्नमुपजायते ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
upasargāḥ śamaṃ yānti grahapīḍāśca dāruṇāḥ duḥsvapnaṃ ca nṛbhirdṛṣṭaṃ susvapnamupajāyate
अर्थ
उपसर्ग शान्त हो जाते हैं, और दारुण ग्रह-पीड़ाएँ भी; और मनुष्यों द्वारा देखा गया दुःस्वप्न सुस्वप्न में बदल जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 12.16 का अर्थ क्या है?▼
उपसर्ग शान्त हो जाते हैं, और दारुण ग्रह-पीड़ाएँ भी; और मनुष्यों द्वारा देखा गया दुःस्वप्न सुस्वप्न में बदल जाता है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 16वाँ श्लोक है।