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दुर्गा सप्तशती 12.14

अध्याय 12, श्लोक 14

अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti)भगवतीवाक्य (फलश्रुति)

रिपवः सङ्क्षयं यान्ति कल्याणं चोपपद्यते नन्दते कुलं पुंसां माहात्म्यं मव श‍ृण्वताम्

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लिप्यंतरण

ripavaḥ saṅkṣayaṃ yānti kalyāṇaṃ copapadyate nandate ca kulaṃ puṃsāṃ māhātmyaṃ mava śa‍ṛṇvatām

अर्थ

उसके शत्रु नष्ट हो जाते हैं, कल्याण की प्राप्ति होती है, और मेरे माहात्म्य को सुनने वालों का कुल आनन्दित होता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 12.14 का अर्थ क्या है?
उसके शत्रु नष्ट हो जाते हैं, कल्याण की प्राप्ति होती है, और मेरे माहात्म्य को सुनने वालों का कुल आनन्दित होता है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 14वाँ श्लोक है।