Mantra.Tips
दुर्गा सप्तशती 12.13

अध्याय 12, श्लोक 13

अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti)भगवतीवाक्य (फलश्रुति)

श्रुत्वा ममैतन्माहात्म्यं तथा चोत्पत्तयः शुभाः पराक्रमं युद्धेषु जायते निर्भयः पुमान्

🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ

लिप्यंतरण

śrutvā mamaitanmāhātmyaṃ tathā cotpattayaḥ śubhāḥ parākramaṃ ca yuddheṣu jāyate nirbhayaḥ pumān

अर्थ

मेरे इस माहात्म्य को, तथा मेरी शुभ उत्पत्तियों (प्राकट्यों) और युद्धों में पराक्रम को सुनकर मनुष्य निर्भय हो जाता है।

इस श्लोक को साझा करें
Share:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 12.13 का अर्थ क्या है?
मेरे इस माहात्म्य को, तथा मेरी शुभ उत्पत्तियों (प्राकट्यों) और युद्धों में पराक्रम को सुनकर मनुष्य निर्भय हो जाता है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 13वाँ श्लोक है।