अध्याय 12, श्लोक 12
अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवतीवाक्य (फलश्रुति)सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसमन्वितः । मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ॥
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लिप्यंतरण
sarvābādhāvinirmukto dhanadhānyasamanvitaḥ manuṣyo matprasādena bhaviṣyati na saṃśayaḥ
अर्थ
वह मनुष्य मेरी कृपा से समस्त बाधाओं से मुक्त और धन-धान्य से सम्पन्न हो जाएगा; इसमें कोई संदेह नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 12.12 का अर्थ क्या है?▼
वह मनुष्य मेरी कृपा से समस्त बाधाओं से मुक्त और धन-धान्य से सम्पन्न हो जाएगा; इसमें कोई संदेह नहीं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 12वाँ श्लोक है।