अध्याय 12, श्लोक 11
अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवतीवाक्य (फलश्रुति)शरत्काले महापूजा क्रियते या च वार्षिकी । तस्यां ममैतन्माहात्म्यं श्रुत्वा भक्तिसमन्वितः ॥
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लिप्यंतरण
śaratkāle mahāpūjā kriyate yā ca vārṣikī tasyāṃ mamaitanmāhātmyaṃ śrutvā bhaktisamanvitaḥ
अर्थ
जो भक्ति से युक्त होकर शरत्काल में की जाने वाली वार्षिक महापूजा में मेरे इस माहात्म्य को सुन लेता है —
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 12.11 का अर्थ क्या है?▼
जो भक्ति से युक्त होकर शरत्काल में की जाने वाली वार्षिक महापूजा में मेरे इस माहात्म्य को सुन लेता है —
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 11वाँ श्लोक है।