अध्याय 10, श्लोक 6
अध्याय 10: Śumbha Vadha — शुम्भवधऋषिरुवाच ततः प्रववृते युद्धं देव्याः शुम्भस्य चोभयोः । पश्यतां सर्वदेवानामसुराणां च दारुणम् ॥
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लिप्यंतरण
ṛṣiruvāca tataḥ pravavṛte yuddhaṃ devyāḥ śumbhasya cobhayoḥ paśyatāṃ sarvadevānāmasurāṇāṃ ca dāruṇam
अर्थ
(ऋषि बोले —) तब समस्त देवों और असुरों के देखते-देखते देवी और शुम्भ दोनों में घोर युद्ध आरम्भ हुआ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 10.6 का अर्थ क्या है?▼
(ऋषि बोले —) तब समस्त देवों और असुरों के देखते-देखते देवी और शुम्भ दोनों में घोर युद्ध आरम्भ हुआ।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 10 (Śumbha Vadha — शुम्भ वध) का 6वाँ श्लोक है।