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दुर्गा सप्तशती 10.3

अध्याय 10, श्लोक 3

अध्याय 10: Śumbha Vadhaशुम्भवध

देव्युवाच एकैवाहं जगत्यत्र द्वितीया का ममापरा पश्यैता दुष्ट मय्येव विशन्त्यो मद्विभूतयः

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लिप्यंतरण

devyuvāca ekaivāhaṃ jagatyatra dvitīyā kā mamāparā paśyaitā duṣṭa mayyeva viśantyo madvibhūtayaḥ

अर्थ

(देवी बोलीं —) 'इस जगत् में मैं अकेली ही हूँ; मेरे अतिरिक्त दूसरी कौन है? अरे दुष्ट! देख, ये मेरी विभूतियाँ मुझ में ही प्रवेश कर रही हैं!'

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 10.3 का अर्थ क्या है?
(देवी बोलीं —) 'इस जगत् में मैं अकेली ही हूँ; मेरे अतिरिक्त दूसरी कौन है? अरे दुष्ट! देख, ये मेरी विभूतियाँ मुझ में ही प्रवेश कर रही हैं!'
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 10 (Śumbha Vadha — शुम्भ वध) का 3वाँ श्लोक है।