अध्याय 10, श्लोक 28
अध्याय 10: Śumbha Vadha — शुम्भवधजज्वलुश्चाग्नयः शान्ताः शान्ता दिग्जनितस्वनाः ॥
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लिप्यंतरण
jajvaluścāgnayaḥ śāntāḥ śāntā digjanitasvanāḥ
अर्थ
शान्त अग्नियाँ प्रज्वलित हो उठीं, और दिशाओं में उत्पन्न (अशुभ) ध्वनियाँ शान्त हो गईं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 10.28 का अर्थ क्या है?▼
शान्त अग्नियाँ प्रज्वलित हो उठीं, और दिशाओं में उत्पन्न (अशुभ) ध्वनियाँ शान्त हो गईं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 10 (Śumbha Vadha — शुम्भ वध) का 28वाँ श्लोक है।