अध्याय 10, श्लोक 27
अध्याय 10: Śumbha Vadha — शुम्भवधअवादयंस्तथैवान्ये ननृतुश्चाप्सरोगणाः । ववुः पुण्यास्तथा वाताः सुप्रभोऽभूद्दिवाकरः ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
avādayaṃstathaivānye nanṛtuścāpsarogaṇāḥ vavuḥ puṇyāstathā vātāḥ suprabho'bhūddivākaraḥ
अर्थ
अन्य लोग बाजे बजाने लगे, और अप्सराओं के समूह नृत्य करने लगे; पुण्यमयी वायु बहने लगी और सूर्य देदीप्यमान हो गया;
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 10.27 का अर्थ क्या है?▼
अन्य लोग बाजे बजाने लगे, और अप्सराओं के समूह नृत्य करने लगे; पुण्यमयी वायु बहने लगी और सूर्य देदीप्यमान हो गया;
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 10 (Śumbha Vadha — शुम्भ वध) का 27वाँ श्लोक है।