अध्याय 10, श्लोक 26
अध्याय 10: Śumbha Vadha — शुम्भवधततो देवगणाः सर्वे हर्षनिर्भरमानसाः । बभूवुर्निहते तस्मिन् गन्धर्वा ललितं जगुः ॥
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लिप्यंतरण
tato devagaṇāḥ sarve harṣanirbharamānasāḥ babhūvurnihate tasmin gandharvā lalitaṃ jaguḥ
अर्थ
तब उसके वध से समस्त देवगण हर्ष से परिपूर्ण हो उठे; गंधर्व मधुर गान करने लगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 10.26 का अर्थ क्या है?▼
तब उसके वध से समस्त देवगण हर्ष से परिपूर्ण हो उठे; गंधर्व मधुर गान करने लगे।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 10 (Śumbha Vadha — शुम्भ वध) का 26वाँ श्लोक है।