अध्याय 10, श्लोक 25
अध्याय 10: Śumbha Vadha — शुम्भवधउत्पातमेघाः सोल्का ये प्रागासंस्ते शमं ययुः । सरितो मार्गवाहिन्यस्तथासंस्तत्र पातिते ॥
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लिप्यंतरण
utpātameghāḥ solkā ye prāgāsaṃste śamaṃ yayuḥ sarito mārgavāhinyastathāsaṃstatra pātite
अर्थ
पहले प्रकट हुए उल्कासहित उत्पात-मेघ शान्त हो गए; और उसके गिर जाने पर नदियाँ अपने मार्ग पर बहने लगीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 10.25 का अर्थ क्या है?▼
पहले प्रकट हुए उल्कासहित उत्पात-मेघ शान्त हो गए; और उसके गिर जाने पर नदियाँ अपने मार्ग पर बहने लगीं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 10 (Śumbha Vadha — शुम्भ वध) का 25वाँ श्लोक है।