अध्याय 10, श्लोक 24
अध्याय 10: Śumbha Vadha — शुम्भवधततः प्रसन्नमखिलं हते तस्मिन् दुरात्मनि । जगत्स्वास्थ्यमतीवाप निर्मलं चाभवन्नभः ॥
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लिप्यंतरण
tataḥ prasannamakhilaṃ hate tasmin durātmani jagatsvāsthyamatīvāpa nirmalaṃ cābhavannabhaḥ
अर्थ
तब उस दुरात्मा के मारे जाने पर समस्त जगत् प्रसन्न हो उठा; उसने परम स्वस्थता पाई और आकाश निर्मल हो गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 10.24 का अर्थ क्या है?▼
तब उस दुरात्मा के मारे जाने पर समस्त जगत् प्रसन्न हो उठा; उसने परम स्वस्थता पाई और आकाश निर्मल हो गया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 10 (Śumbha Vadha — शुम्भ वध) का 24वाँ श्लोक है।