अध्याय 10, श्लोक 23
अध्याय 10: Śumbha Vadha — शुम्भवधस गतासुः पपातोर्व्यां देवी शूलाग्रविक्षतः । चालयन् सकलां पृथ्वीं साब्धिद्वीपां सपर्वताम् ॥
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लिप्यंतरण
sa gatāsuḥ papātorvyāṃ devī śūlāgravikṣataḥ cālayan sakalāṃ pṛthvīṃ sābdhidvīpāṃ saparvatām
अर्थ
देवी के शूल के अग्रभाग से क्षत-विक्षत होकर वह प्राणरहित होकर पृथ्वी पर गिर पड़ा, और समुद्र, द्वीप व पर्वतों सहित समस्त पृथ्वी को कँपा गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 10.23 का अर्थ क्या है?▼
देवी के शूल के अग्रभाग से क्षत-विक्षत होकर वह प्राणरहित होकर पृथ्वी पर गिर पड़ा, और समुद्र, द्वीप व पर्वतों सहित समस्त पृथ्वी को कँपा गया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 10 (Śumbha Vadha — शुम्भ वध) का 23वाँ श्लोक है।