अध्याय 10, श्लोक 22
अध्याय 10: Śumbha Vadha — शुम्भवधतमायान्तं ततो देवी सर्वदैत्यजनेश्वरम् । जगत्यां पातयामास भित्त्वा शूलेन वक्षसि ॥
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लिप्यंतरण
tamāyāntaṃ tato devī sarvadaityajaneśvaram jagatyāṃ pātayāmāsa bhittvā śūlena vakṣasi
अर्थ
तब समस्त दैत्यजनों के स्वामी उस आते हुए को देवी ने शूल से वक्ष में बेधकर भूमि पर गिरा दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 10.22 का अर्थ क्या है?▼
तब समस्त दैत्यजनों के स्वामी उस आते हुए को देवी ने शूल से वक्ष में बेधकर भूमि पर गिरा दिया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 10 (Śumbha Vadha — शुम्भ वध) का 22वाँ श्लोक है।