अध्याय 10, श्लोक 21
अध्याय 10: Śumbha Vadha — शुम्भवधस क्षिप्तो धरणीं प्राप्य मुष्टिमुद्यम्य वेगवान् । अभ्यधावत दुष्टात्मा चण्डिकानिधनेच्छया ॥
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लिप्यंतरण
sa kṣipto dharaṇīṃ prāpya muṣṭimudyamya vegavān abhyadhāvata duṣṭātmā caṇḍikānidhanecchayā
अर्थ
पटका हुआ वह दुरात्मा भूमि पर पहुँचकर वेग से मुक्का उठाए चण्डिका के वध की इच्छा से फिर दौड़ा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 10.21 का अर्थ क्या है?▼
पटका हुआ वह दुरात्मा भूमि पर पहुँचकर वेग से मुक्का उठाए चण्डिका के वध की इच्छा से फिर दौड़ा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 10 (Śumbha Vadha — शुम्भ वध) का 21वाँ श्लोक है।