अध्याय 10, श्लोक 19
अध्याय 10: Śumbha Vadha — शुम्भवधनियुद्धं खे तदा दैत्यश्चण्डिका च परस्परम् । चक्रतुः प्रथमं सिद्धमुनिविस्मयकारकम् ॥
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लिप्यंतरण
niyuddhaṃ khe tadā daityaścaṇḍikā ca parasparam cakratuḥ prathamaṃ siddhamunivismayakārakam
अर्थ
तब आकाश में दैत्य और चण्डिका ने परस्पर ऐसा मल्लयुद्ध किया, जैसा पहले कभी नहीं हुआ था — जो सिद्धों और मुनियों को विस्मित करने वाला था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 10.19 का अर्थ क्या है?▼
तब आकाश में दैत्य और चण्डिका ने परस्पर ऐसा मल्लयुद्ध किया, जैसा पहले कभी नहीं हुआ था — जो सिद्धों और मुनियों को विस्मित करने वाला था।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 10 (Śumbha Vadha — शुम्भ वध) का 19वाँ श्लोक है।