अध्याय 10, श्लोक 18
अध्याय 10: Śumbha Vadha — शुम्भवधउत्पत्य च प्रगृह्योच्चैर्देवीं गगनमास्थितः । तत्रापि सा निराधारा युयुधे तेन चण्डिका ॥
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लिप्यंतरण
utpatya ca pragṛhyoccairdevīṃ gaganamāsthitaḥ tatrāpi sā nirādhārā yuyudhe tena caṇḍikā
अर्थ
और उछलकर देवी को पकड़े हुए वह ऊँचे आकाश में जा चढ़ा; वहाँ भी निराधार रहकर चण्डिका उससे युद्ध करती रहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 10.18 का अर्थ क्या है?▼
और उछलकर देवी को पकड़े हुए वह ऊँचे आकाश में जा चढ़ा; वहाँ भी निराधार रहकर चण्डिका उससे युद्ध करती रहीं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 10 (Śumbha Vadha — शुम्भ वध) का 18वाँ श्लोक है।