अध्याय 10, श्लोक 17
अध्याय 10: Śumbha Vadha — शुम्भवधतलप्रहाराभिहतो निपपात महीतले । स दैत्यराजः सहसा पुनरेव तथोत्थितः ॥
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लिप्यंतरण
talaprahārābhihato nipapāta mahītale sa daityarājaḥ sahasā punareva tathotthitaḥ
अर्थ
थप्पड़ के प्रहार से आहत होकर वह दैत्यराज भूमि पर गिर पड़ा; पर सहसा फिर वैसे ही उठ खड़ा हुआ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 10.17 का अर्थ क्या है?▼
थप्पड़ के प्रहार से आहत होकर वह दैत्यराज भूमि पर गिर पड़ा; पर सहसा फिर वैसे ही उठ खड़ा हुआ।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 10 (Śumbha Vadha — शुम्भ वध) का 17वाँ श्लोक है।