अध्याय 10, श्लोक 16
अध्याय 10: Śumbha Vadha — शुम्भवधस मुष्टिं पातयामास हृदये दैत्यपुङ्गवः । देव्यास्तं चापि सा देवी तलेनोरस्यताडयत् ॥
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लिप्यंतरण
sa muṣṭiṃ pātayāmāsa hṛdaye daityapuṅgavaḥ devyāstaṃ cāpi sā devī talenorasyatāḍayat
अर्थ
उस दैत्यश्रेष्ठ ने देवी के हृदय पर मुक्के का प्रहार किया; और देवी ने भी उसे थप्पड़ से वक्ष पर मारा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 10.16 का अर्थ क्या है?▼
उस दैत्यश्रेष्ठ ने देवी के हृदय पर मुक्के का प्रहार किया; और देवी ने भी उसे थप्पड़ से वक्ष पर मारा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 10 (Śumbha Vadha — शुम्भ वध) का 16वाँ श्लोक है।