अध्याय 10, श्लोक 15
अध्याय 10: Śumbha Vadha — शुम्भवधचिच्छेदापततस्तस्य मुद्गरं निशितैः शरैः । तथापि सोऽभ्यधावत्तां मुष्टिमुद्यम्य वेगवान् ॥
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लिप्यंतरण
cicchedāpatatastasya mudgaraṃ niśitaiḥ śaraiḥ tathāpi so'bhyadhāvattāṃ muṣṭimudyamya vegavān
अर्थ
आक्रमण करते उसके मुद्गर को उन्होंने तीखे बाणों से काट दिया; फिर भी वह वेगवान् मुक्का उठाए उन पर झपटा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 10.15 का अर्थ क्या है?▼
आक्रमण करते उसके मुद्गर को उन्होंने तीखे बाणों से काट दिया; फिर भी वह वेगवान् मुक्का उठाए उन पर झपटा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 10 (Śumbha Vadha — शुम्भ वध) का 15वाँ श्लोक है।