अध्याय 10, श्लोक 14
अध्याय 10: Śumbha Vadha — शुम्भवधहताश्वः स तदा दैत्यश्छिन्नधन्वा विसारथिः । जग्राह मुद्गरं घोरमम्बिकानिधनोद्यतः ॥
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लिप्यंतरण
hatāśvaḥ sa tadā daityaśchinnadhanvā visārathiḥ jagrāha mudgaraṃ ghoramambikānidhanodyataḥ
अर्थ
घोड़े मारे जाने, धनुष कटने और सारथि के नष्ट होने पर तब उस दैत्य ने अम्बिका के वध को उद्यत होकर एक भयंकर मुद्गर पकड़ा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 10.14 का अर्थ क्या है?▼
घोड़े मारे जाने, धनुष कटने और सारथि के नष्ट होने पर तब उस दैत्य ने अम्बिका के वध को उद्यत होकर एक भयंकर मुद्गर पकड़ा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 10 (Śumbha Vadha — शुम्भ वध) का 14वाँ श्लोक है।