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दुर्गा सप्तशती 10.13

अध्याय 10, श्लोक 13

अध्याय 10: Śumbha Vadhaशुम्भवध

तस्यापतत एवाशु खड्गं चिच्छेद चण्डिका धनुर्मुक्तैः शितैर्बाणैश्चर्म चार्ककरामलम् अश्वांश्च पातयामास रथं सारथिना सह

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लिप्यंतरण

tasyāpatata evāśu khaḍgaṃ ciccheda caṇḍikā dhanurmuktaiḥ śitairbāṇaiścarma cārkakarāmalam aśvāṃśca pātayāmāsa rathaṃ sārathinā saha

अर्थ

उसके झपटते ही चण्डिका ने धनुष से छोड़े तीखे बाणों से उसका खड्ग और सूर्य-किरण के समान निर्मल ढाल काट डाली; और उसके घोड़ों तथा सारथि सहित रथ को गिरा दिया।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 10.13 का अर्थ क्या है?
उसके झपटते ही चण्डिका ने धनुष से छोड़े तीखे बाणों से उसका खड्ग और सूर्य-किरण के समान निर्मल ढाल काट डाली; और उसके घोड़ों तथा सारथि सहित रथ को गिरा दिया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 10 (Śumbha Vadha — शुम्भ वध) का 13वाँ श्लोक है।