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दुर्गा सप्तशती 10.11

अध्याय 10, श्लोक 11

अध्याय 10: Śumbha Vadhaशुम्भवध

छिन्ने धनुषि दैत्येन्द्रस्तथा शक्तिमथाददे चिच्छेद देवी चक्रेण तामप्यस्य करे स्थिताम्

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लिप्यंतरण

chinne dhanuṣi daityendrastathā śaktimathādade ciccheda devī cakreṇa tāmapyasya kare sthitām

अर्थ

धनुष कट जाने पर दैत्यराज ने शक्ति उठाई; पर उसके हाथ में स्थित उसे भी देवी ने चक्र से काट डाला।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 10.11 का अर्थ क्या है?
धनुष कट जाने पर दैत्यराज ने शक्ति उठाई; पर उसके हाथ में स्थित उसे भी देवी ने चक्र से काट डाला।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 10 (Śumbha Vadha — शुम्भ वध) का 11वाँ श्लोक है।