अध्याय 10, श्लोक 10
अध्याय 10: Śumbha Vadha — शुम्भवधततः शरशतैर्देवीमाच्छादयत सोऽसुरः । सापि तत्कुपिता देवी धनुश्चिच्छेद चेषुभिः ॥
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लिप्यंतरण
tataḥ śaraśatairdevīmācchādayata so'suraḥ sāpi tatkupitā devī dhanuściccheda ceṣubhiḥ
अर्थ
तब उस असुर ने सैकड़ों बाणों से देवी को ढक दिया; और उस पर क्रुद्ध देवी ने अपने बाणों से उसका धनुष काट डाला।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 10.10 का अर्थ क्या है?▼
तब उस असुर ने सैकड़ों बाणों से देवी को ढक दिया; और उस पर क्रुद्ध देवी ने अपने बाणों से उसका धनुष काट डाला।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 10 (Śumbha Vadha — शुम्भ वध) का 10वाँ श्लोक है।