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दुर्गा सप्तशती 9.3

अध्याय 9, श्लोक 3

अध्याय 9: Niśumbha Vadhaनिशुम्भवध

ऋषिरुवाच चकार कोपमतुलं रक्तबीजे निपातिते शुम्भासुरो निशुम्भश्च हतेष्वन्येषु चाहवे

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लिप्यंतरण

ṛṣiruvāca cakāra kopamatulaṃ raktabīje nipātite śumbhāsuro niśumbhaśca hateṣvanyeṣu cāhave

अर्थ

(ऋषि बोले —) रक्तबीज के गिर जाने और युद्ध में दूसरों के मारे जाने पर शुम्भ तथा निशुम्भ असुरों ने अतुलनीय क्रोध किया।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 9.3 का अर्थ क्या है?
(ऋषि बोले —) रक्तबीज के गिर जाने और युद्ध में दूसरों के मारे जाने पर शुम्भ तथा निशुम्भ असुरों ने अतुलनीय क्रोध किया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 9 (Niśumbha Vadha — निशुम्भ वध) का 3वाँ श्लोक है।