अध्याय 8, श्लोक 57
अध्याय 8: Raktabīja Vadha — रक्तबीजवधन चास्या वेदनां चक्रे गदापातोऽल्पिकामपि । तस्याहतस्य देहात्तु बहु सुस्राव शोणितम् ॥
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लिप्यंतरण
na cāsyā vedanāṃ cakre gadāpāto'lpikāmapi tasyāhatasya dehāttu bahu susrāva śoṇitam
अर्थ
किन्तु गदा के प्रहार से उन्हें तनिक भी पीड़ा न हुई; और आहत उसके शरीर से बहुत रक्त बह निकला।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 8.57 का अर्थ क्या है?▼
किन्तु गदा के प्रहार से उन्हें तनिक भी पीड़ा न हुई; और आहत उसके शरीर से बहुत रक्त बह निकला।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 57वाँ श्लोक है।