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दुर्गा सप्तशती 8.40

अध्याय 8, श्लोक 40

अध्याय 8: Raktabīja Vadhaरक्तबीजवध

रक्तबिन्दुर्यदा भूमौ पतत्यस्य शरीरतः समुत्पतति मेदिन्यां तत्प्रमाणो महासुरः

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लिप्यंतरण

raktabinduryadā bhūmau patatyasya śarīrataḥ samutpatati medinyāṃ tatpramāṇo mahāsuraḥ

अर्थ

जब-जब उसके शरीर से रक्त की एक बूँद भूमि पर गिरती, तब-तब पृथ्वी से उसी के बराबर का एक महान् असुर उत्पन्न हो जाता।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 8.40 का अर्थ क्या है?
जब-जब उसके शरीर से रक्त की एक बूँद भूमि पर गिरती, तब-तब पृथ्वी से उसी के बराबर का एक महान् असुर उत्पन्न हो जाता।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 40वाँ श्लोक है।