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दुर्गा सप्तशती 7.7

अध्याय 7, श्लोक 7

अध्याय 7: Caṇḍa-Muṇḍa Vadhaचण्डमुण्डवध

अतिविस्तारवदना जिह्वाललनभीषणा निमग्नारक्तनयना नादापूरितदिङ्मुखा

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लिप्यंतरण

ativistāravadanā jihvālalanabhīṣaṇā nimagnāraktanayanā nādāpūritadiṅmukhā

अर्थ

जिनका मुख अत्यन्त फैला हुआ, लपलपाती जीभ से भयानक, गहरे लाल नेत्र वाला, और जिनकी गर्जना से दिशाएँ भर गई थीं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 7.7 का अर्थ क्या है?
जिनका मुख अत्यन्त फैला हुआ, लपलपाती जीभ से भयानक, गहरे लाल नेत्र वाला, और जिनकी गर्जना से दिशाएँ भर गई थीं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 7 (Caṇḍa-Muṇḍa Vadha — चण्ड-मुण्ड वध) का 7वाँ श्लोक है।