अध्याय 4, श्लोक 31
अध्याय 4: Śakrādi Stuti — शक्रादिस्तुतियदयं निहतः शत्रुरस्माकं महिषासुरः । यदि चापि वरो देयस्त्वयास्माकं महेश्वरि ॥
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लिप्यंतरण
yadayaṃ nihataḥ śatrurasmākaṃ mahiṣāsuraḥ yadi cāpi varo deyastvayāsmākaṃ maheśvari
अर्थ
कि हमारा यह शत्रु महिषासुर मारा गया। फिर भी हे महेश्वरी! यदि आप हमें कोई वर देना चाहती हैं, तो —
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 4.31 का अर्थ क्या है?▼
कि हमारा यह शत्रु महिषासुर मारा गया। फिर भी हे महेश्वरी! यदि आप हमें कोई वर देना चाहती हैं, तो —
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 4 (Śakrādi Stuti — शक्रादि स्तुति) का 31वाँ श्लोक है।