अध्याय 4, श्लोक 30
अध्याय 4: Śakrādi Stuti — शक्रादिस्तुतिदेवा ऊचुः भगवत्या कृतं सर्वं न किञ्चिदवशिष्यते ॥
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लिप्यंतरण
devā ūcuḥ bhagavatyā kṛtaṃ sarvaṃ na kiñcidavaśiṣyate
अर्थ
(देवता बोले —) 'भगवती द्वारा सब कुछ कर दिया गया है; कुछ भी शेष नहीं बचा,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 4.30 का अर्थ क्या है?▼
(देवता बोले —) 'भगवती द्वारा सब कुछ कर दिया गया है; कुछ भी शेष नहीं बचा,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 4 (Śakrādi Stuti — शक्रादि स्तुति) का 30वाँ श्लोक है।